आकाशीय विज्ञान

उड़नेवाली तश्तरी का निर्माण; टेलीपैथिक शाश्त्र द्वारा लिखाया गया, दिव्य पिता जेहोवाह द्वारा, हर जगह से.-

हा पुत्र; में तुम्हारे पास उड़नेवाली तश्तरी के उद्भव के बारे में लिखवाता हूँ; जो की दिव्य पिता जेहोवाह के धर्मग्रन्थ में स्वर्ग की निशानी और आग के गोले के जैसे दीखते है; छोटे पुत्र, चलो हम अपने आप को आकाशगंगा त्रिनाम के आल्फा और ओमेगा सूर्य पर ले जाते है. आल्फा और ओमेगा, दिव्य पिता जेहोवाह? यह सच है पुत्र; मुझे लगता है की आपके उस दिव्य उपदेश में मैंने उस शब्द को पढ़ा है; हा इसीलिए पुत्र;  पहला जन्मा हुए सौर पुत्र ने कहा: में आल्फा और ओमेगा हूँ; दिव्य पिता जेहोवाह के प्रति उनका क्या अर्थ था? उनका अर्थ था: में आपके उद्भव स्थान से हूँ; में वहाँ से हूँ जहाँ अपने शुरू किया था और आप जहाँ पहुंचने वाले हो; में प्रत्येक नियति का प्रारम्भ हूँ और में ही अंत हूँ; तो फिर आकाशगंगीय शब्द आल्फा और ओमेगा खुद स्वर्ग के साम्राज्य से है? इसीलिए मेरे पुत्र; यह सृष्टि स्वर्ग का साम्राज्य कहलाती हे; एक अनंत आकाश जहाँ हर जगह विशाल है; जहाँ किसी भी कल्पनीय चीज़ की सीमा ज्ञात नहीं है;  क्या दिव्य दृश्य देख पा रहा हूँ में परम पिता जेहोवाह! क्या असाधारा चहल-पहल है! में मानव जाति को नहीं देख रहा हूँ; मेरे नन्हे पुत्र, में तुम्हे यह कहता हूँ की स्वर्ग के साम्राज्य में, परम पिता के सिवा कोई भी महत्वपूर्ण नहीं है; यह तुम्हारी पृथ्वी पर एक दिव्य कहावत के रूप में घोषित हुआ था की: आप धूल से बने हो और धूल में ही समाने वाले हो; इसका अर्थ है की पृथ्वी सूक्ष्म ग्रहो से या सूक्ष्म जीवाणु ग्रहो के ब्रह्माण्ड का एक हिस्सा है; यह इसलिए है क्योंकि परम पिता जेहोवाह ने अपने बनाये प्राणिओ के परिमाण में ना तो ग्रहो के परिमाण में कोई सीमा रखी है; में देख रहा हु की तुम अचंभित हो पुत्र;  हा दिव्य पिता जेहोवाह; क्या अतिविशाल रंगो के सूर्य है! और वह मानवीय रूप में परिवर्तित होते है और अन्य रूप में जो की में नहीं जनता हूँ! इसीलिए पुत्र; वह अपने स्वयं के पुनर्जन्म है जो पहले अन्य ब्रह्माण्ड में थे; क्या स्पष्टीकरण किया है दिव्य पिता जेहोवाह! अनंत पिता, जैसे की आप जानते है, मेरे पृथ्वी गृह पर, जो में देख रहा हूँ, वह एक प्रश्न कहलाता है, करोडो लोग मानते है और करोडो नहीं भी मानते; नन्हे बच्चे, में तुम्हे कहना चाहता हूँ की जो मानते नहीं थे उनका कोई अस्तित्व नहीं रहेगा; क्योकि जब उन्होंने मना किया था, उन्होंने अपने आपको सभी तत्वों के खिलाफ कर दिया था जो भावी अस्तित्व बनाते है; ऐसे तत्वों भी उनको मना कर देते है, जब वो फिर से जीवन के नए रूप चाहेंगे; तुम क्यों सोचते हो की तुम्हारी दुनिया में ये सिखाया गया है की ईश्वर अनंत है? में दिव्य पिता जेहोवाह को समझने की शुरुआत कर रहा हूँ; आपकी अनंतता का अर्थ है की तुम अनगिनत संख्या में जीवन दे सकते हो; अतः पुत्र; और में तुम्हे बताऊंगा की विधाता अपने संतानो को जो अनंत अस्तित्व प्रदान करते है वह भी उनके दिव्य उपदेशो में घोषित हुए थे; वो कहावत है: हरएक आत्मा जो फिर से जन्म लेती है उसका अर्थ है की उनके पहले भी अनेक अस्तित्व थे और भविष्य में भी होंगे; कोई भी फिर से जन्म लेता है ताकि वो नयी जिंदगी को जान सके; पुत्र में वास्तव में यहाँ तक कहता हूँ की जो सिर्फ एक अस्तित्व में मानते है वो सिर्फ एक में ही रहेंगे; और जो अनंत अस्तित्व में मानते है वो अनंतता में रहेंगे; हर कोई अपने जीवन के इम्तिहान में जैसा सोचता है उसीके अनुसार प्राप्त करता है; तुम्हे प्राप्त करने के लिए सिर्फ विश्वास करना होगा; तुम वो पीले सूर्य को देख प् रहे हो? में उन्हें देख रहा हूँ परम पिता जेहोवाह; मेरे नन्हे पुत्र, वो आल्फा और ओमेगा सूर्यो का सौर परिवार है;  जिस जगह से मेरा पृथ्वी ग्रह आया है! इसीलिए पुत्र; कितना महान! में कितनी सुन्दर दिव्य स्त्री को देख रहा हूँ दिव्या पिता जेहोवाह! वह कौन है? वह दिव्य माता ओमेगा है; जिस वजह से मेरे वत्स में तुम्हे कहूंगा की सूर्यो मे भी जातिया होती है; दूरवर्ती ग्रहो के प्राणियों की तरह ही; जो यहाँ ऊपर है वैसे ही निचे भी है; इसकी कल्पना कौन करेगा दिव्य पिता जेहोवाह! यदि मेरे विश्व के लोगोने यह उत्कृष्ट सत्य देखा होता! आह! अगर उन्होंने देखा होता मेरे पुत्र, तुम्हारी दुनिया मे अब तक की सबसे महान क्रांति हो चुकी होती; यह क्रांति इतनी महान होगी की यह जो स्वर्ण के नियमो से बनी हुई अजीब जीवन प्रणाली अदृश्य हो जाएगी; और अनंत नियमो से आधारित एक नयी जीवन प्रणाली जन्म लेगी; मेरे पुत्र, मे तुम्हारे मन मे प्रश्नो का ज्वालामुखी पढ़ सकता हूँ. तुम उन्हें पूछ सकते हो जिससे तुम्हारी दुनिया के प्रश्न स्पष्ट हो सके; धन्यवाद दिव्य पिता जेहोवाह; यह लिखा हुआ है की आप हमारे दिव्य सर्जक है, और हमारे ज्ञान का प्रकाश है; इस जहान पे जिसको स्वर्ग का साम्राज्य कहते है वहाँ समय क्या करता है? यहाँ पर स्वर्गीय समय है; और मेरे वत्स मे तुम्हे कहूंगा, की स्वर्गीय समय का एक क्षण सांसारिक समय की सदियों के बराबर है; वाह कितना अद्भुत है दिव्य पिता जेहोवाह! अब मे पृथ्वी के बहोत सारे रहस्य समज रहा हूँ! इसलिए मेरे पुत्र; यह समय के उस नियम से है जो कहता है की दिव्य पिता ने कुछ ही क्षण पूर्व इस पृथ्वी का निर्माण किया था; यही नियम अन्य ग्रहो के आवास को भी लागु होता है; इसका मतलब है की समय अनंत मात्रा से सापेक्षिक है, दिव्य पिता जेहोवाह? है ऐसा ही हे मेरे पुत्र; ग्रहो के समय वो जिस समय पर उद्भवित हुए थे उसके अधीन है; ईश्वर के सामने सभी समय जिवंत है; जिवंत का क्या अर्थ है, दिव्य पिता जेहोवाह? इसका अर्थ है की वस्तु एवं आत्मा अपने आपको विधाता के सामने व्यक्त करते है; वस्तु को भी आत्मा के सामान ही अधिकार मिले है; कोई भी ईश्वर के सामने कम नहीं है; वस्तु के नियमो मे वस्तु, ना की आत्मा अपने नियमो मे; वाह क्या प्रकाश है अपनी दिव्य दुनिया मे, दिव्य पिता जेहोवाह! यह वही नियम है जो आपने सिखाया था की हम सब आपकी दिव्य उपस्थिति मे समान है? अतः पुत्र; जब तुम्हारे दिव्य पिता जेहोवाह ने उस नियम को आपकी दुनिया के सामने व्यक्त किया था, दिव्य पिता ने अनंतता को आच्छादित किया था; उन्होंने वस्तु एवं आत्माको भी आच्छादित कर लिया था; तुम्हारी मानवता ने जो इम्तिहान मांगे थे, वे उस प्रकार से ध्यान मे लेने चाहिए थे; और सिर्फ इस ग्रह तक सिमित नहीं है; इम्तिहान तो इम्तिहान है; सच्चे विश्वास ने आपने आप पर कोई सिमा नहीं रखी है; जो अल्पकालिक है और इस ग्रह तक सिमित है उससे खुद को प्रभावित नहीं करने देना चाहिए था; जिन्होंने अपने इम्तिहान मे इस तरह से सोचा था, वो अपने इम्तिहान मे निष्फल होते है; आपको सिखाया नहीं गया की ईश्वर का जो भी है वह अनंत है; इस लिए दिव्य पिता जेहोवाह; मुझे लगता है की स्वर्ण के अजीब नियमो ने इम्तिहान की दुनिया को भ्रमित कर दिया है; मे तुम्हे बताना चाहूंगा की ऐसे अजीब भ्रम को भी दूर करना चाहिए; किसीको अपने आपको अल्पकालिक चीज़ो से अचंभित नहीं होने देना चाहिए, किसी भी कल्पनीय रूप मे; जिन्होने अपने स्वर्ण के अजीब भ्रम के प्रति मानसिक प्रतिरोध को रोका नहीं, उनके साथ क्या होगा, दिव्य पिता जेहोवाह? उन लोगो को भुगतना होगा पुत्र, जब तक वो अजीब भ्रम चला था उसकी एक एक क्षण; प्रत्येक क्षण! इसलिए वत्स; और इसकी वजह है की हर एक मानव आत्मा ने हरएक चीज से ऊपर जीवन का इम्तिहान की बिनती की है; इस बिनती मे सभी सूक्ष्म चीज़ो का समावेश होता है, भौतिक एवं आत्मीय; इसमें जीवनकाल मे उद्भवते सभी विचार समाविष्ट होते है, शुरुआत से लेकर बारह वर्ष की आयु तक; क्योकि निर्दोषता को न्याय की जरुरत नहीं है; इसमें क्षण, अणु, कोष, गोचर, अगोचर – सब कुछ आ जाता है; जो महसूस किया जाता है पर दिखाई दिया नहीं जाता; और जो दिखाई देता है और स्पर्श भी किया जाता है; नन्हे बच्चे, मे यह कहूंगा की उसने परम पिता से ये सब माँगा है और वचन दिया है; विधाता किसी पे कुछ भी थोपता नहीं है, क्योकि वो तो अनंत है; जीवित ईश्वर किसी को भी मजबूर नहीं करते; मजबूर करना ये अपूर्णता का पर्याय है और यह जटिल है; और विधाता मे कोई जटिलता नहीं है; इसलिए दिव्य पिता जेहोवाह, मे आपकी दिव्य कृपा को दुःख सकता हूँ; मे देख रहा हूँ की दिव्य सौर माता ओमेगा मेरी तरफ मुस्कुरा रही है; उसने तुम्हे अपने प्रथम पुत्र के रूप मे मान लिया है, जो दूरवर्ती और सूक्ष्म ग्रह से आता है;  मे महसूस कर रहा हूँ की वे मेरा मन पढ़ रही है; यहाँ स्वर्ग के साम्राज्य मे हर कोई किसी का भी मन पढ़ सकता है जो की अनंतता की सबसे बड़ी प्राकृतिक बात है; नन्हे पुत्र, यहाँ कुछ भी छुपा नहीं है; और जिन्होंने अपने जिंदगी के इम्तिहान मे गुप्तता का आचरण किया है, वह इस राज्य मे फिर कभी नहीं आएंगे; वत्स, मे यह कहूंगा की यह गुप्तता अंधकारमय है; यह प्रकाश के नियमो के अधीन नहीं है; यहाँ जैसे की तुम देख सकते हो, किसी भी दुनिया का पापी प्रवेश नहीं कर सकता; क्योकि हर एक क्षण उसका मन पढ़ते ही वो बेनकाब होता है; और एक पापी को साम्राज्य से बहार फेंक दिया जायेगा; दिव्य पिता जेहोवाह, मे अनगिनत चमकते छोटे बिन्दुओ को देख पा रहा हूँ, जो सौर माता ओमेगा के गर्भ से आते है; वो क्या है? वे भावी पृथ्वी ग्रह है; क्योकि में ये कहूंगा पुत्र की यहाँ की तरह ही वहाँ भी विश्व का समय होता है, दिव्य माता ओमेगा फिर भी ग्रहो और प्राणिओ का सर्जन करती रहती है;  में तुम्हारा मन देख और पढ़ रहा हूँ की तुम सोच रहे हो की दिव्य पिता जेहोवाह और दिव्य सौर माता ओमेगा के मध्य क्या सम्बन्ध है; हां दिव्य पिता जेहोवाह; वत्स में यह कहूंगा की हम दोनों को सर्जन करने की समान शक्ति मिली है; अनंत क्रिया में हम समानाधिकारवादी है; अनंत क्रिया दिव्य पिता? अनंत क्रिया का अर्थ क्या है? पुत्र अनंत क्रिया का अर्थ है मनुष्य में समय के अति सूक्ष्म एकम में, प्रचंड मात्रा में सर्जन करने की शक्ति; परम पिता और दिव्य माता इस ब्रह्माण्ड में अद्वितीय है; प्रत्येक दुनिया का हरएक बालक किसी निजी सर्जनात्मक क्रिया के साथ जन्मता है; क्योकि कोई भी परम पिता जेहोवाह की दिव्य विरासत से वंचित नहीं रहता; उनकी क्रिया के परिमाण के अनुरूप जो अनुक्रम है, वो ब्रह्माण्ड के सभी प्राणिओ की विचारधारा के अनुसार है; तुम्हारे ग्रह में, मानवीय क्रिया का परिमाण कम हो गया था;  क्यों दिव्य पिता जेहोवाह? क्योकि प्रत्येक मानवीय प्राणी एक अजीब आत्महित और स्वार्थी मनोवृति से प्रभावित था, जो स्वर्ण के नियमो से बहार आये थे; क्यों की में यह कहूंगा की पूंजीवाद से जानी जाती विचित्र जीवन प्रणाली स्वर्ग के साम्राज्य में किसी के भी द्वारा मांगी गई नहीं थी; यहाँ तक की तथाकथित धनिक लोग भी; क्योकि कुछ भी अनुचित ईश्वर से माँगा नहीं गया है; यह अजीब और अज्ञात जीवन प्रणाली, जिसमे असमानता जैसे विचित्र नियमो है वो स्वर्ग के साम्राज्य में नहीं लिखे गए थे; स्वर्ग में जो कुछ भी नहीं लिखा गया था वो उस राज्य में अजीब ही कहलायेगा; और जो लोग स्वर्ग के साम्राज्य के अजीब नियमो को जीते थे, वह स्वर्ग में प्रवेश नहीं करेंगे; वाह मेरे पृथ्वी ग्रह के लिए क्या खूब स्पष्टीकरण दिया है, दिव्य पिता जेहोवाह! अतः वत्स; और में यह कहूंगा पुत्र की यह स्पष्टीकरण तुम्हारी दुनिया में सबको आंसू लाने और दाँत पीसने तक उत्तेजित कर देगा; यह एक ऐसी विचित्र जीवन प्रणाली के अंतिम न्याय का प्रारम्भ है जो स्वर्ग के साम्राज्य में किसीने माँगा नहीं था; दिव्य पिता जेहोवाह, मैने आपके दिव्य उपदेश में उनको पढ़ा है; मैने कभी सोचा नहीं था की यह खुदकी जीवन प्रणाली से ही न्याय होगा;  यह मेरे लिए अजीब है पुत्र; यह नहीं लिखा गया था की सबकुछ कल्पना किया हुआ और उत्पन्न किया हुआ न्यायित किया जायेगा? हा है दिव्य पिता; चलो पुत्र हम आल्फा और ओमेगा सूर्यो के करीब आते है; में देख रहा हूँ की तुम में उड़नेवाली तश्तरिओं के निर्माण का साक्षी बनने में असीम रूचि है; वत्स, में तुम्हे पहले से बता देता हूँ की यह अवकाशीय पात्र के निर्माण में किसी भी प्रकार की सीमा नहीं रखी गई है; सूर्यो और पृथ्वीओ जिनमे इन पात्रो का निर्माण हुआ है, वह अनंत है; विज्ञान के अनुसार उनके प्राणिओ की सर्जनात्मक क्रिया शक्ति और अनुक्रम है जो अनंत ब्रह्माण्ड में उनके अनुरूप है; अपनी क्रिया में जितनी ज्यादा शक्ति, उतना ही बड़ा फरमान जो किसीमे अपने ग्राह्यीक प्रकृति में है; क्या अतिविशाल प्रयोगशाला है ये! दिव्य पिता जेहोवाह, में देख रहा हूँ की इसका कोई अंत नहीं है; हा मेरे पुत्र; स्वर्ग के साम्राज्य की प्रयोगशालाए व् निर्माणशालाए सूर्य से सूर्य तक चलती है; यहाँ विपुल मात्रा में चांदी-जैसे पात्र बनते है; तो में देख पा रहा हूँ दिव्य पिता जेहोवा; में विस्मय और भावनावश मौन हूँ; यह पात्र कितने अद्भुत है! ये ऐसी खूबसूरती से बने है जो मेरे हृदय को स्थगित कर देते है! हा यही है मेरे पुत्र; में देख रहा हूँ की यहाँ पर सब लोग हलके नीले रंग के चौगे पहनते है; और में उनके आसपास रंगीन प्रभामंडल देख रहा हूँ; हा मेरे नन्हे पुत्र; में तुम्हे यह कहूंगा की यह हलके नीले रंग का चौगा कर्म की अनंत विचारधारा को दर्शाता है; तुम्हारे पृथ्वी ग्रह पर भी सबको इसी तरह से पोषक पहनन चाहिए; और रंगीन प्रभामंडल जो है वह उनके अपने स्वर्ग है, जहाँ वे अनंत पुनर्जन्म को संपन्न करते है; पृथ्वी पर जहाँ आप रह रहो हो, वहाँ सब के शरीर के आसपास रंगीन प्रभामंडल है; वे वही रंग है जो आप अपने बचपन से देखते आये हो; सभी मानव को अपने शरीर के इर्द-गिर्द ३१८ रंग दिए गई है; प्रत्येक रंग अपनी मानवीय विचारधारा में एक सद्गुण को दर्शाता है; इसका अर्थ है की प्रत्येक वैचारिक सद्गुण का एक रंग है, दिव्य पिता जेहोवाह? हा मेरे पुत्र; जो भौतिक है और जो आध्यात्मिक है उन सब में रंग है; क्योकि प्राणिमात्र मांस से बना है और यह मन से है; और, मांस और मन दोने एक दूजे को लगातार प्रभावित करते है; प्राणिओ में जो आँख से प्रवेश करता है वह सभी वस्तुओ में सब से ऊपर व्याप्त रहता है; वत्स, में तीन आकाशीय इंजीनियरों को कहूंगा; अरे! वह इतने तेज कैसे दीखते है? पुत्र, वह एक टेलीपैथिक कॉल था; बस वैसे ही जैसे मेने तुम्हे बहुत सारे सांसारिक बरसो पहले कॉल किया था; मुझे यद् है दिव्य पिता जेहोवाह; में उसे कभी नहीं भूल सकता; ब्रह्माण्ड के सर्जनहार, आपका आशीर्वाद है; हम सदा आपकी दिव्य आज्ञा में रहेंगे, जिसे अवकाशीय इंजिनियर कहते है; हा मेरे राज्य के पुत्रो; में तुम्हे दूरवर्ती ग्रह पृथ्वी पर सबसे पहले जमने पुत्र से परिचित कराना चाहता हूँ; पृथ्वी ग्रह? अवकाशीय इंजीनियरोंने पूछा; हम किसी पृथ्वी ग्रह को नहीं जानते, दिव्य पिता जेहोवाह; में जानता था मेरे पुत्र; पृथ्वी एक मिट्टी का ग्रह है; यह आकाशगंगा का एक हिस्सा है; यह मांस से बानी दुनिया है; इसका एक साथी ग्रह हे जो निस्तेज-पिले रंग का अविकसित सूर्य है;  वह किना दिलचस्प है ये दिव्य पिता जेहोवाह; अनजान शब्द हमेशा चित्ताकर्षक होते है; इस तरह से में तुम्हारा अवकाशीय मन पढ़ सकता हूँ; पृथ्वी के प्रथम पुत्र, खुदका परिचय दो; हा दिव्य पिता जेहोवाह; आपकी दिव्य कृपा मुझ पे हो; दिव्य पिता जेहोवाह की दिव्य कृपा से में लुइस एंटोनिओ, इस साम्राज्य का भाई हूँ. में इस पृथ्वी ग्रह से हूँ; जीवन के इम्तिहानो का ग्रह; उनके उद्गम स्थल के विस्मरण के साथ; सांसारिक भाई का स्वागत है; हम स्पेस इंजिनियर है; हम हमारा परिचय देंगे; में शांति इंजिनियर हूँ; और में इंजिनियर डलसिनिओ (मिठास) हूँ; और में हूँ इंजिनियर केलेस्टियल (अवकाशीय); हम तुम्हारी दुनिया के बारे में जानने के लिए उत्सुक है; जो कुछ भी हमारे अनंत विधाता को दिलचस्प लगता है वो हमारे लिए महत्वपूर्ण है; वैसे ही मुझे मेरे अवकाशीय भाई;  हम दिव्य पिता जेहोवाह को बिनती करेंगे की वे हमें सौर दूरदर्शन से आपके पृथ्वी ग्रह के दर्शन कराए; में देख रहा हूँ की तुम अचंभित हो पुत्र; हा दिव्य पिता जेहोवाह; ये दिव्य सौर दूरदर्शन क्या है? ये है दिव्य सौर दूरदर्शन; आह! पृथ्वी! सौर मंडल जो पृथ्वी को चारो और से घेरते है! क्या अतिविशाल और अतिसुन्दर रंगीन दूरदर्शन है! हा मेरे पुत्र;  यह दिव्य टेलीविजन ब्रह्मांड के अपने तत्वों से बाहर आता है; और इसका अंत नहीं है; यह कभी नहीं होगा; मैं आपको बता दूंगा कि इस दिव्य टेलीविजन को आपके ग्रह पृथ्वी पर भी घोषित किया गया था; मेरा दिव्य उपदेश में जो परीक्षणों की दुनिया को दिया गया था; कहता है: जीवन की पुस्तक; वाह क्या अद्भुत रहस्योद्घाटन, परमात्मा पिता जेहोवाह! हा मेरे प्रथम पुत्र; सौर टेलीविजन ब्रह्मांड के अजूबो में से एक है; परीक्षणों के ग्रहों पर, जैसा कि आपका पृथ्वी है, यह टेलीविजन प्रकृति के अपने तत्वों से पैदा हुआ है; जीवन के दौरान जो कुछ किया, वह इस सौर टेलीविजन पर संगृहीत है; उड़ती तश्तरी के पास भी सौर टेलीविजन है; वे, उनके दल, को सौर माता पिता के रूप में जाना जाता है; ब्रह्मांड के बड़े बच्चे, पिता परमेश्वर में दिव्य ट्रिनिटी से अधीन; क्योंकि पृथ्वी पर मानव माता-पिता हैं, पृथ्वी के बाहर सौर माता पिता भी हैं; जो ऊपर है, वैसे ही निचे है; और पुत्र मैं तुम्हे यह बताना चाहूंगा कि हर सौर माता पिता भी मानवीय प्राणी थे, इतने पुरानी दुनिया में कि वे अब अंतरिक्ष में नहीं हैं; वे भी मांस से बने प्राणी थे; क्योंकि नम्र शुरुआत हर किसी के लिए है; वह जो विनम्र और सूक्ष्म नहीं था, स्वर्ग के राज्य में महान नहीं होता; इसका अर्थ है कि कोई भी ग्रह निर्माण में अद्वितीय नहीं है; हर ग्रह के जन्म से पहले, अनन्त अन्य ग्रह थे; जो विचारशील ब्रह्मांड के हैं उन सभी लोगों के लिए यह जानना एक अनन्त खोज है कि पहले कौन था; नन्हे बालक, मैं आपको एक अवकाशीय पल के लिए छोड़ दूँगा; दिव्य अवकाशीय इंजीनियरों सांसारिक बेटे को सूचित करे; मैं अन्य सूरजों में रहूंगा; ईश्वर करे आपका दिव्य सत्य हो, पिता जेहोवाह! मैं देखता हूं कि जब सोलर माता-पिता सदैव का अभिवादन करते हैं, तो वे ऐसा उड़ते हुए करते हैं; सांसारिक पुत्र, तुम जो चाहें पूछ सकते हो; आपको निर्देश करनेका दिव्य आदेश हैं; अनन्त धन्यवाद दिव्य सौर माता पिता; आप क्यों उड़ते हो? मैं देख सकता हूं कि यहां स्वर्ग के राज्य में कोई नहीं जानता है कि हाथ मिलाना अभिवादन करनेका एक तरीका है; तो यह सांसारिक भाइयों है; दूरवर्ती ग्रहों पर कई रिवाज़ पैदा होते हैं; इस राज्य में आप देख सकते हैं, कोई हाथ नहीं मिलता है; यह इसलिए है बेटा क्योंकि एक दूसरे के दिमाग को पढ़कर, एक और जीवित मनोविज्ञान का जन्म राज्य के अनंत काल में हुआ है; मैं देख सकता हूं कि जब आप उडते हैं, तो आप अपने बाएं हाथ अपने दिल पर रख देते हैं; इसका क्या अर्थ है? आकाशीय-स्वर्गीय अभिवादन वत्स; यह प्रत्येक वस्तु के प्रति अपने आप से सम्मान को दर्शाता है; अपने दिल पर अपना हाथ रखने का अर्थ है कि हमारी सोच के सभी गुण को समान रूप से अभिवादित करें; स्वर्गीय अभिवादन में, खुदके व्यक्तित्व को महत्वपूर्ण होने से रोका जाता है; क्योंकि आकाशीय मनोविज्ञान यह सिखाता है कि व्यक्तित्व बदलता रहता है जैसे विचार भावना लगातार और अनन्त अस्तित्वों का ज्ञात रखे जाती है; आकाशीय सोच किसी भी क्षण में अपने आप में रुकती नहीं है; पुत्र हम देखते हैं कि आप अपने पृथ्वी ग्रह के गर्वित प्राणियों में सोचने से अवशोषित होते हैं; इसलिए स्वर्गीय बंधुओ; मुझे हमेशा आश्चर्य है कि अभिमानी व्यक्तियों को ऐसे अजीब प्रभाव कहाँ से मिलता है; हम आपको बतायेंगे पुत्र; गर्व अंधकारमय है; जो ब्रह्मांड के अन्य क्षेत्र हैं, जहाँ प्रकाश के ब्रह्मांडों का कोई भी बच्चा घुसने की हिम्मत नहीं कर सकता; तुम्हारी दुनिया की गर्वित  आत्माऐ अंधकार में रहती थी; वे वहां कई जन्मो तक रहे; वे अभी भी अंधेरे के कुछ प्रभाव में है; क्या होता है पुत्र, कि आत्मा जीवन के आकर्षण के लिए अनुरोध करती है, अंधकार का अजीब प्रभाव कमजोर होता जाता है; आपकी दुनिया के गर्व प्राणियों को अभी जीवित रहना है; यह हर अपूर्णता के साथ होता है, जो आत्मा के विकास को बाधित करता है; इसी कारण से पुन: जन्म लेना आवश्यक है; आत्मा जो दिव्य पिता जेहोवाह को किसी प्रकार के जीवन को फिर से जानने का अनुरोध नहीं करता है, उसकी प्रगति बन्द हो जाती है और ऊब हो जाता है; कितना दिव्य और सरल तर्क है! लेकिन अवकाशीय भाई, अंधकार किसने बनाया? या बुराई कहाँ से आती है? पुत्र, बुराई अपने बच्चों से निकलती है; यह आत्मा की स्वतंत्र इच्छा का एक परिणाम है; ऐसा इसलिए होता है कि जब बच्चे बहुत अधिक जीते हैं, तो वे महान रचनात्मक विज्ञान प्राप्त करने में सफल होते हैं; और महान शक्तियां होने पर वे गर्वित और अभिमानी हो जाते हैं; ऐसी हालत में कि वे अपने सभी चीज़ो के निर्माता की उपेक्षा करते है; यह वही हे जो लूसिफ़ेर के साथ हुआ था; आपकी दुनिया में शैतान से बेहतर जाना जाता है; सांसारिक पुत्र, तुम्हे जानना चाहिए कि प्रत्येक विचार जो मन में पैदा होता है, वह शारीरिक रूप से बोलने से नहीं मरता; मानसिक विचार चाहे वे अच्छे हो या बुरे, अंतरिक्ष में अंकुरित होते हैं, और प्रत्येक सूक्ष्म और अदृश्य विचार से, सूक्ष्म ग्रह का जन्म होता है; इसका अर्थ है कि ब्रह्मांड के सभी बच्चों को दिव्य पिता, यहोवाह की रचनात्मक विरासत मिली है; परमात्मा पिता एक विशाल तरीके से सर्जन करते है, और उनके बच्चों को एक सूक्ष्म तरीके से; हर ग्रह एक मानसिक विचार था; और हर ग्रह का जन्म अदृश्य से दृश्यमान तक होता है जब उसका पहला मानसिक विचार अंकुरित होता है; इसका अर्थ है कि हर दुनिया अनंत आकारों से गुजरती है; अतः आपके ग्रह पृथ्वी का आकार पिन के सिर जैसा था; यह कहने के लिए, एक छोटी सी गेंद, एक छोटा पिंग-पोंग बॉल, एक फुटबॉल, एक बिच-बॉल जब तक वह वर्तमान सांसारिक दुनिया तक नहीं पहुंच पाती थी; कितना आकर्षक सादगीभरा स्पष्टीकरण की ब्रह्माण्ड क्या है! हा मेरे पुत्र; सबसे बड़ी सादगी से और सबसे बड़ी मौलिकता जो मन कल्पना कर सकता है, सृष्टि के निर्माता अपने बच्चों को सूक्ष्म विज्ञान में समझाते हैं कि सबसे कठिन क्या और क्या समझाना असंभव है; अब मैं समझा मेरे भाई, मेरे ग्रह पृथ्वी पर, बुद्धिमान पुरुष ग्रह की उत्पत्ति क्यों नहीं खोज पाए हैं; उन्होंने सूक्ष्म चीज़ो को ध्यान में नहीं लिया! वे आंतरिक विषय में नहीं सोचते! वे अपनी मानसिक खोज में समानतावादी नहीं थे और न ही आत्मा के साथ! ऐसा है मेरे सांसारिक पुत्र; क्या विशाल रंगीन अग्नि मैं देख सकता हूँ! यह दिव्य पिता जेहोवाह है! कितना विशाल! विशाल सूरज उसकी दिव्य उपस्थिति में पिन के सिर से छोटा दिखाई देते हैं! हा मेरे पुत्र; दिव्य पिता अद्वितीय है; उनके दिव्य रूपों की कोई सीमा नहीं है; आकाशीय इंजीनियर डलसिनिओ कहते हैं, चलो हम करीब आये; जो तीनों में अधिक आकाशगांगेय पदानुक्रम का है; तुम्हारी प्रशंसा हो दिव्य सनातन पिता! और वैसे ही में वत्स; मैं झुकता हूँ और मेरा बांया हाथ मेरे दिल पर रखता हूं; और मैं उस सर्वोच्च पल में महसूस करता हूँ, कुछ मीठे बिजली के निर्वहन की तरह, जो मेरे पुरे शरीर के माध्यम से जाता है; और मुझे लगता है कि एक मिठा सपना मुझ पर जा रहा है; लेकिन मैं सो नहीं पड़ता; दूरस्थ आकाशगंगाओं से, बच्चों को मैं आपको सुन रहा हूं; मुझे बताओ पुत्र, आखिर में जिस विषय पर तुम आकाशीय इंजीनियरों के साथ बात कर रहे थे, क्या वो तुम्हे किसी भी चीज़ की याद नहीं दे रहे? मेरा दिव्य पिता जेहोवाह, क्या आप ग्रहों की उत्पत्ति की बात करते है? ये सच है पुत्र; में सोच रहा हूँ दिव्य पिता … पुत्र, मैं तुम्हे पहले को याद दिला दू; दिव्य उपदेश, जहाँ परीक्षणों की दुनिया का अनुरोध किया गया था, एक दृष्टान्त ने तुम क्या बात कर रहे थे उसकी घोषणा की थी; यह दिव्य दृष्टान्त है जो कहता है: स्वर्ग के राज्य में महान बनने के लिए तुम्हे विनम्र होना चाहिए; ऐसा है दिव्य पिता जेहोवाह; और एक मानसिक विचार की तुलना में अधिक नम्र और सूक्ष्म क्या है? कितना सटीक, दिव्य पिता जेहोवाह! पुत्र, तुम्हारे मानसिक विचार दर्शाते है की सबसे सूक्ष्म क्या है, जो भी बात हो; आपके सोचते समय हर पल जो विचार उत्पन्न होते है वे केवल आप महसूस कर सकते है पर देख नहीं सकते हैं; कितना प्रभावशाली है ये परम पिता जेहोवाह! और कोई भी उनके विचारों को कोई भी इनकार नहीं करता, भले ही वे उन्हें न देखे!  हा ऐसा ही पुत्र; और मैं तुम्हे यह बताना चाहूंगा कि यह नियम जो की नम्र और सूक्ष्म है वह उनको तोड़ देता है जिन्होंने भौतिकवाद के परीक्षणों का अनुरोध किया था; क्योंकि वे अपने विचारो में मानते है! क्या मजा है दिव्य पिता जेहोवाह! पुत्र, मज़ा और दुखद दोनों; उन सभी विचारों के लिए जो उन लोगों द्वारा उत्पन्न हुए थे जिन्होंने खुद को भौतिकवादी के रूप में घोषित किया उनके जीवन की परीक्षाओं के दौरान, विधाता अपनी मुहर नहीं लगाते; उनके भविष्य और सूक्ष्म ग्रहों को दिव्य पिता से मिलने के लिए एक अनंत काल का संघर्ष करना होगा; दिव्य पिता जेहोवाह, क्या इसका अर्थ यह है कि उन भावी ग्रहों अंधकार से सम्बंधित है? योग्य कहु तो नहीं; लेकिन उनके विकास और विस्तार के दौरान, उनके प्राणियों के बीच जबरदस्त नाटक आयेंगे; ऐसे भावी ग्रह निश्चित रूप से स्वर्गीय ग्रह नहीं होंगे; मैं तुम्हे यह बताऊंगा कि जब कोई एक विचार उत्पन्न करता है, तो जो बन रहा है वो एक अनंत प्रसस्त चुंबकीय तरंग है; और जैसे ही लहर बढ़ती है, उसके सूक्ष्म चुंबकत्व भी बढ़ता है, और भविष्य के उभरते हुए ग्रह की पूरी प्रकृति पर हमला करता है; उस ग्रह के विचारशील प्राणी भी विकास में विचार के चुंबकत्व का प्रभाव प्राप्त करेंगे; जिसका अर्थ है कि उन प्राणियों के दैनिक जीवन की विचारधारा अपने सभी दिव्य अधिकारों के सर्जक के प्रति नकारना होगा; कितना जबरदस्त परमात्मा पिता जेहोवाह! हा पुत्र ऐसा है; जैसे ही यह सूक्ष्म सांसारिक स्वर्ग में आदम और ईव के साथ हुआ; सूक्ष्म, दिव्य पिता जेहोवाह? हा मेरे पुत्र; जब आदम और ईव  के स्वर्ग का जन्म हुआ था, तो आपका ग्रह छोटे से पिंग-पोंग बॉल जैसा था; अभूतपूर्व परमात्मा पिता जेहोवाह! पुत्र, जो अभूतपूर्व लगता है वह एक वास्तविकता बन जाती है; क्योंकि सर्जनहार के के लिए कुछ भी असंभव नहीं है; आपको क्यों लगता है कि यह परीक्षणों की दुनिया को सिखाया गया था कि भगवान अनंत हैं? मैं  समझने लगा हूं दिव्य पिता जेहोवाह; चूंकि मैं एक बच्चा था और आपको हर जगह देखने लगा, मैं इसे समझ रहा हूं; दिव्य पिता जेहोवाह, जो मुझे रोज देख रहा था और जब से मैं बच्चा था, क्या परीक्षणों की संसार को पता चल जाएगा? सब कुछ पता चल जाएगा पुत्र; और सब कुछ रोल्स में जाना जाएगा, जैसे हम रोज़ करते हैं; मानवता ने अपने जीवन परीक्षणों में लैम्ब ऑफ़ गॉड (ईश्वर के प्रिय) की रोल्स को जानने का अनुरोध किया; उन्होंने ज्ञान की रोशनी का अनुरोध किया; उन्होंने जो नहीं जानते थे वह जानने का अनुरोध किया; जो इस दुनिया में सबको पहले से ही पता है, रहस्योद्धाटन दोहराता नहीं; यही है दिव्य पिता जेहोवाह; आपकी दिव्यता और प्यार आपके बच्चों में मिलेगा; पुत्र, मैं तुम्हे पहले से ही कहूंगा कि टेलिथैथिक शास्त्र जो आपके दिव्य पिता जेहोवाह आपको हर दिन लिखवाते है, वह दुनिया में क्रांतिकारी परिवर्तन करेगा; इसलिए मैं ये बचपन से देख सकता हूं दिव्य पिता; सौर दूरदर्शन जो मेरे दिमाग में है, मुझे इस दुनिया का भविष्य दिखाता है; हा मेरे पुत्र; जो भी तुम देखते हो वो वास्तविक बन जाता है; हां, मैं एक बच्चा था तबसे इसकी पुष्टि कर रहा हूं दिव्य पिता; मुझे कुछ दिखाई देता है जिससे मुझे बहुत दुख होता है; मैं उन सभी के दांतों को रोता और पीसता देख सकता हूं जो मुझ पर विश्वास नहीं करते थे मैंने उन्हें आपके दिव्य समाचार बताये थे; उन्होंने मुझ पर भी मजाक किया; मैं जानता हूं पुत्र; वे भूल गए थे कि प्रत्येक आत्मा को जीवन में परीक्षण किया गया है; ऐसा क्यों होना चाहिए, परमात्मा पिता जेहोवाह?  आह पुत्र! क्या प्रश्न है! मैं तुम्हें बताऊंगा वत्स; जो लोग आप से इनकार करते हैं और आप पर मजाक करते हैं, वे एक अजीब तरह के विश्वास से प्रभावित थे, जो अपने स्वयं के मनोविज्ञान के रूप में कई मान्यताओं से भरे थे, भगवान केवल एक ही थे; जब आत्माएं जीवों के स्वरूपों के बारे में जानने के लिए पुनर्जन्म मांगती हैं, तो दिव्य पिता जेहोवाह जो कुछ भी दूरवर्ती ग्रहो में भेजते है वो समय बीतते कोई भी इनकार नहीं करता जो उनके द्वारा चुना गया था; परमात्मा पिता, ऐसी अजीब नकारात्मकता कहाँ से आती है? नन्हे पुत्र, यह एक अजीब धार्मिक प्रभाव से बाहर आया, जिसने विश्वास की दुनिया को ईश्वर केवल एक  होते हुए भी कई मान्यताओं में बांटा; जैसे ही आपने मुझसे कहा दिव्य पिता जेहोवाह की में एक बालक था! हा पुत्र; चलो हम देखते हैं कि उन बचपन के दिनों में तुम्हे और क्या याद आता है, जब आपके दिव्य पिता जेहोवाह ने, अपनी ईश्वरीय इच्छाशक्ति के आधार पर विधाता ने तुम्हारे साथ संवाद करने का निर्णय किया; परम पिता मुझे याद आया है कि, जो आप दुनिया को नकारने की अजीब स्वार्थपरता भेजते हैं, वो दिव्य ग्रहों के उपदेशो में लिखा है; हमारे दिव्य उपदेश में, आप ने अपने भविष्य के मानसिक विभाजन के बारे में तथाकथित धार्मिक प्राणियों को हर आध्यात्मिक मान्यता में चेतावनी दी; वो कह दो पुत्र; दिव्य चेतावनी-दृष्टान्त जो कहता है: केवल शैतान ही विभाजन करता है और वह खुद को ही विभाजित करता है; हा मेरे पुत्र; बुराई की शक्ति-शैतान ने स्वर्ग के राज्य में बहुत पहले के समय में मेरे स्वर्गदूतों को विभाजित किया था; धार्मिक आत्माओं ने मेरे सांसारिक बच्चों को ईश्वर केवल एक होते हुए भी कई मान्यताओं में विभाजित किया; दिव्य पिता के बारे में इस अजीब मानसिक भ्रम को स्वर्ग के राज्य में किसीने भी माँगा नहीं था; क्योंकि कोई भी विचारधारा जो मेरे बच्चों को दूरवर्ती ग्रहों में बांटती है वह स्वर्ग के राज्य में मौजूद नहीं है; धार्मिक प्राणियों जो जीवन के परीक्षणों के दौरान उभरे, वे अपने ऐसे चिंताजनक काम के लिए हर पल हर क्षण भुगतेंगे; उनकी वजह से कोई भी मानव आत्मा जो अपनी मासूमियत में विभाजन के चुंबकत्व को जान पाया, वो से स्वर्ग के राज्य में प्रवेश नहीं करता; और न ही उनमें से किसी ने भी प्रवेश किया है; कोई भी वही मासूमियत के साथ स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करता है जिसके साथ वह बाहर निकला था; इस दुनिया में तथाकथित धार्मिक प्राणी, भूल गए कि दिव्य अंतिम निर्णय सभी के लिए समान है; इसके बढ़कर पुत्र; न्याय उनके साथ शुरू होगा; बाइबल शब्द जो कहते हैं: और वह हर किसी का न्याय करेगा, इसका अर्थ है कि हर धार्मिक मनुष्य और वो लोग जो विश्वास के रूप सिखाते हैं, वे जीवन की परीक्षा में अंतिम निर्णय के भीतर हैं; अगर हर कोई अपने काम से न्याय पाता है, जीवन के रूप जो हर किसी को जीवन की परीक्षा में दे दिया, वे काम के भीतर भी हैं; वाह क्या अभिव्यक्ति की दिव्य स्पष्टता अपने पाई है परमात्मा पिता जेहोवाह!  मेरे पुत्र, मैं हर ज्ञान का प्रकाश हूं; ईश्वरीय पिता जेहोवाह, क्या मैं ईश्वरीय सौर दूरदर्शन पर विश्वास के इस अजीब रूप का अंत देख सकता हूं, जिसने सभी को विभाजित किया? हाँ मेरे पुत्र, ये देखो; वाह! क्या विशाल रंगीन टीवी! यह पृथ्वी के बादलों के माध्यम से जाता है! तुमने क्या देखा पुत्र? मैं देखता हूं कि हर धार्मिक मानव रोता है; मैं दूसरों को अपने विचारों को कोसते देखता हूं; मुझे लगता है कि दुनिया उन्हें धिक्कारती है; वे उन्हें माफ़ नहीं करते जो फिर से स्वर्ग के राज्य में प्रवेश न करने देने में की बहुत बड़ी आध्यात्मिक करुणता है! दिव्य पिता जेहोवाह, अब मैं आपके दिव्य उपदेश के पवित्र दृष्टांत को समझा जो कहता है: और वहाँ रोना और दांत पीसना ही होगा; और क्या देखते हो पुत्र? मैं मानव समुद्र देखता हूं जो भौतिक मंदिरों को नष्ट करती हैं; क्या भयानक दृश्य हैं, परमात्मा पिता जेहोवाह! कई लोग आत्महत्या करते हैं!  उनके लिए बुरा है बेटा; क्योकि दिव्य आदेश कहते हैं: तू कभी मारना नहीं, और निश्चित रूप से खुद को भी नहीं मारना चाहिए; आह! क्या सुदर्शन व्यक्ति है! वह एक सूरज की तरह चमकता है! और वह प्रकृति की हिला देता है! यह मसीह है! है मेरे पुत्र; तुम्हारी सांसारिक शिक्षा तुम्हे यह नहीं बताती है; तुम्हारे दिव्य पिता जेहोवाह है जो तुम्हे अंतर्ज्ञान और विवेक के माध्यम से कहते है; असीम धन्यवाद दिव्य पिता जेहोवाह; यह लिखा है कि आप हर जगह हैं; आप अपने आपको अदृश्य और शून्यवकाश से व्यक्त करते हैं; हा वत्स; क्या मानवीय समुद्र प्रथम जन्मे पुत्र को घेरते हैं, दिव्य पिता जेहोवाह! कभी ऐसा कुछ नहीं देखा गया है! और तुम इस देखने में  परम पिता के बाद सबसे प्रथम हो; मैंने बस एक महान सत्य को समझा है, ईश्वरीय पिता जेहोवाह: प्रथम जन्मा पुत्र भी एक सौर जनक है; हाँ ऐसा ही है मेरे नन्हे पुत्र; जो आपने अभी देखा है वह भी परीक्षणों की दुनिया के द्वारा ज्ञात होना चाहिए; मेरा दिव्य उपदेश ऐसा कहता है: और वह ज्ञान के सूर्य की तरह चमकते हुए आएगा; मेरा पुत्र एक पहले जन्मा सौरपुत्र है; वह सौर ट्रिनिटी का है, दिव्य पिता जेहोवाह; तुम्हारी मानवता में मानव त्रिमूर्ति से संबंधित है,  दिव्य पिता जेहोवाह; प्रत्येक अपने स्वयं के गांगेय पदानुक्रम में; और कोई भी वंचित नहीं है; दिव्य पिता, उड़ती तश्तरी पृथ्वी के ऊपर हैं! वे कितने विशाल हैं!  हा मेरे पुत्र; जब एक सौर जन्मजात पुत्र एक निश्चित ग्रह पर प्रतिष्ठा के अवतार का अनुरोध करता है, तो स्वर्ग के राज्य की शक्ति उसके साथ कार्य करती हैं; पुत्र अब तुम क्या देखते हो? मैं देख रहा हूं कि उड़ने वाले तश्तरी के अंदर उनके दल रंगीन टेलीविजन पर ग्रहों पर होने वाले वही दृश्य देख रहे हैं; हाँ पुत्र; जो ऊपर है वही निचे भी है; तुम और क्या देख सकते हो? मैं प्रथम-जन्मे पुत्र मसीह और उड़ती तश्तरी की मण्डली के बीच दूरसंचार होता देखता हूं! हाँ वत्स; यह हमेशा ऐसा ही रहा है; पिता के राज्य के हर दूत ने हमेशा स्वर्ग के राज्य के साथ टेलीपाथिक रूप में संपर्क किया है; कारण प्रत्येक पैगम्बर के भीतर है, जिसने भगवान से एक पुनर्जन्म माँगा है; इसी तरह आपकी दुनिया को सभी युगों के पवित्र ग्रंथ प्राप्त हुए; पैगम्बर के रूप में अपनी जिंदगी के दौरान, उनके पास प्रत्येक क्षण में, उनकी मात्रा में रहने वाले जिवंत टेलिपथी थी; इसका क्या अर्थ है, दिव्य पिता जेहोवाह? इसका अर्थ है कि ईश्वर से मांगी हुई प्रत्येक शक्ति हरएक द्वारा प्राप्त क्रिया के आनुपातिक होती है; तुम्हे इसे समझने के लिए, मैं तुम्हे ये समझाऊंगा: मेरे सौर जन्मजात पुत्र मसीह और अन्य पेगम्बरों के बीच जो दुनिया को ज्ञात हुआ, उसमे एक बड़ा अंतर है; मेरा पहला जन्मा पुत्र संसार से है; ब्रह्मांड में एक अनंत जगह जहां सब कुछ विशाल है; जहां कोई सीमा नहीं है; बुद्ध, अल्लाह, मुहम्मद, आदि जैसे संत, सूक्ष्म जगत से संबंधित हैं; यही कारण है कि वे दुनिया का न्याय नहीं करेंगे, जहां उन्होंने शिक्षा छोड़ी थी। दुनिया अपने प्रथम-जन्मे पुत्र से न्यायित की जाएगी ऐसा लिखा था.-

आल्फा और ओमेगा.-